शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश, दोनों पड़ोसी राज्यों की सरकारों से कर्मचारियों व पेंशनरों के वित्तीय हितों की रक्षा करने की जोरदार वकालत की है। उन्होंने पंजाब सरकार से जहां नया वेतन आयोग गठित करने की मांग उठाई है, वहीं हिमाचल सरकार को भी लंबित एरियर के भुगतान को लेकर घेरा है।

नरेश ठाकुर ने पंजाब सरकार से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य में 7वें वेतन आयोग का तुरंत गठन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एसीपी योजना को भी पुनः बहाल करने की मांग की।
महासंघ के अध्यक्ष ने तर्क दिया कि कर्मचारियों ने अपने पूरे सेवाकाल के दौरान पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ काम किया है, इसलिए समयबद्ध वित्तीय लाभ और पदोन्नति (प्रमोशन) संबंधी सुविधाएं मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। एसीपी योजना कर्मचारियों को उनके सेवा काल में एक निश्चित अवधि के बाद वित्तीय उन्नयन प्रदान करती है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और उनकी कार्यक्षमता में सुधार होता है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक राहत देना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पंजाब में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से लाखों सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनरों को सीधा लाभ मिलेगा।
पंजाब के साथ-साथ प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार के समक्ष भी कर्मचारियों की सुलगती मांगों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों का जो वेतनमान व पेंशन एरियर लंबे समय से लंबित है, उसे शीघ्र से शीघ्र एकमुश्त या प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जाए।
उन्होंने कहा कि देय वित्तीय लाभों के भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण प्रदेश के कर्मचारियों और विशेषकर बुजुर्ग पेंशनरों को भारी आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। ठाकुर ने हिमाचल सरकार को याद दिलाया कि उन्हें अपने चुनावी वादों के अनुरूप लंबित एरियर का भुगतान बिना किसी देरी के प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
महासंघ के अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी राज्य के विकास की रीढ़ वहां के कर्मचारी और पेंशनर होते हैं। व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए उनकी जायज और न्यायसंगत मांगों की अनदेखी करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से कर्मचारी हितैषी नीतियां अपनाने और सभी लंबित मामलों का त्वरित व स्थाई समाधान निकालने की पुरजोर अपील की है।