नाहन : सांस्कृतिक संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली द्वारा इसके उदयपुर स्थित क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित 519वें ओरिएंटेशन कोर्स में हिमाचल प्रदेश के शिक्षकों ने अपनी अनूठी सांस्कृतिक छाप छोड़ी है। 21 दिवसीय इस विशेष सांस्कृतिक कार्यशाला में हिमाचल की टीम ने अपनी जीवंत प्रस्तुति से न केवल पूरे सभागार को देवभूमि की लोक-संस्कृति से सराबोर कर दिया, बल्कि देश भर से आए प्रतिभागी शिक्षकों की खूब वाहवाही भी लूटी।
उदयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की 21 दिवसीय कार्यशाला में भारत के 16 विभिन्न राज्यों से कुल 85 शिक्षक भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय कला, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं से रूबरू कराना है, ताकि वे इस अनुभव का उपयोग स्कूली शिक्षा में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कर सकें।

इस राष्ट्रीय मंच पर हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व 6 शिक्षक कर रहे हैं, जिनमें से 5 शिक्षक अकेले सिरमौर जिले से हैं। सिरमौर जिले से सुभाष चंद, नरेंद्र ठूडू, प्रदीप ठाकुर, कपिल शणक्वाण व राकेश शर्मा और कांगड़ा जिले से राकेश कुमार इस कार्यशाला में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
कार्यशाला के दौरान आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति सत्र में हिमाचल की टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे सभागार को देवभूमि की लोक-संस्कृति के रंग में रंग दिया। हिमाचली लोक धुनों, पारंपरिक परिधानों और मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक साथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरी कार्यशाला का ध्यान हिमाचल की संस्कृति की ओर आकर्षित कर लिया।
शिक्षकों के लिए आयोजित इस 21 दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं को स्कूली शिक्षा से जोड़ना है। इस कार्यशाला में सीखे गए अनुभवों और सांस्कृतिक ज्ञान का उपयोग शिक्षक भविष्य में अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास और कला-एकिकृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करेंगे।