सोलन कॉलेज में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मेगा मॉक ड्रिल आयोजित

Photo of author

By Hills Post

सोलन: उच्च शिक्षा निदेशालय शिमला के निर्देशानुसार सोमवार के दिन राजकीय महाविद्यालय सोलन में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर 10 वें राज्यव्यापी मेगा मॉक अभ्यास का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष अभ्यास भूकंप, बादल फटने और वनों की आग जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान दिन व रात की परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षित बचाव कार्य की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित किया गया था।

​प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय सोलन डॉ. मनीषा कोहली के मार्गदर्शन में सुबह ठीक 10:30 बजे कॉलेज परिसर में दो मिनट तक लगातार सायरन बजाकर इस अभ्यास की शुरुआत की गई। सायरन की आवाज सुनते ही कला और विज्ञान ब्लॉक के विभिन्न तलों पर मौजूद सभी छात्र-छात्राएं और प्राध्यापक वर्ग पूर्व-निर्धारित सुरक्षित रास्तों से होते हुए खुले मैदान की ओर बढ़े।

​इस मॉक ड्रिल को सुचारू और अनुशासित ढंग से संपन्न कराने में कॉलेज के NSS, NCC और रोवर्स-रेंजर्स के स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने परिसर में मौजूद स्टाफ और विद्यार्थियों को सुरक्षित खुले स्थान पर पहुंचने में मदद की और इस बात का विशेष ध्यान रखा कि सुरक्षित निकास के दौरान किसी भी तरह की अफरा-तफरी न मचे।

​आपदा प्रबंधन के कड़े नियमों का पालन करते हुए इस ड्रिल के दौरान हेड काउंट प्रणाली को भी गंभीरता से लागू किया गया। मॉक ड्रिल शुरू होने से ठीक पहले परिसर में मौजूद कुल 61 लोगों की गिनती दर्ज की गई थी। सुरक्षित निकास प्रक्रिया के बाद, खुले मैदान में दोबारा की गई गणना में सभी 61लोग सुरक्षित पाए गए, जिससे यह अभ्यास शत-प्रतिशत सफल रहा।

​इस मॉक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और स्टाफ को यह सिखाना था कि किसी भी अप्रत्याशित आपदा के समय बिना घबराए खुद को और दूसरों को कैसे सुरक्षित निकाला जाए। इस दौरान उन्हें आपदा पूर्व की तैयारियों, आपातकालीन निकास मार्गों की पहचान और आपदा के समय त्वरित व प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए जागरूक किया गया।

​इस सफल आयोजन के बाद कॉलेज प्रशासन ने सभी स्वयंसेवकों, स्टाफ सदस्यों और छात्र-छात्राओं के अनुशासित सहयोग की सराहना की और भविष्य में भी ऐसी जीवन-रक्षक तैयारियों को जारी रखने की बात कही।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।